029 जानिए कैसे बनाते है फूलों से गुलाल ! विदेशों में भी पहुंचाया जाता है ये गुलाल

 जानिए कैसे बनाते है फूलों से गुलाल ! विदेशों में भी पहुंचाया जाता है ये गुलाल



इस साल वृंदावन की होली, मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों से बने गुलाल से महकेगी. इन फूलों से गुलाल बनाने का काम शहर में रहने वाली विधवाएं एवं परित्यक्त महिलाएं कर रही हैं. चैतन्य विहार स्थित महिला आश्रय सदन ‘संवासिनी’ की महिलाएं महिला एवं बाल विकास विभाग की अगुआई में गठित ‘ब्रज गंधा प्रसार समिति’ की देखरेख में फूलों से पर्यावरण एवं स्वास्थ्य अनुकूल रंग और गुलाल बना रही हैं. इसमें कन्नौज की सरकारी संस्था ‘सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र’ तकनीकी सहयोग कर रहा है.

 इस समय आश्रम में रहने वाली निराश्रित महिलाएं होली की तैयारी में जुटी हुईं हैं, कोई लाल रंग का गुला बना रहा है, तो कोई हरा, वो भी फूलों से बने हर्बल गुलाल।

मथुरा जिले के वृन्दावन में स्थित बृज गंधा प्रसार समिति कई निराश्रित महिलाओं का बसेरा है जिसमें ज़्यादातर विधवा महिलाएं अपनी छोटी, अलग सी दुनिया में रहती हैं। ब्रजगंधा प्रसाद समिति के प्रोडक्ट कॉर्डिनेटर विक्रम शिवपुरी ने बताते हैं, “अपनी सुविधा के अनुसार यहां रह रही माताएं समय निकाल कर फूलों से हर्बल गुलाल तैयार करने का काम कर रही हैं। यहां पर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में चढ़ने वाला फूल सबसे ज्यादा आता है। इस दौरान प्रतिदिन करीब 40-50 किलो फूल आते हैं।”



वो आगे बताते हैं, “चढ़ावे के फूलों की सबसे पहले सफाई जैसे धागा व अन्य कूड़ा करकट निकलना आदि काम इस आश्रम की वृद्ध माताओं द्वारा किया जाता है, जिसके बाद छंटाई का काम होता है। उसके बाद फूलों को सुखाया जाता है और फिर पीसकर उनका पाउडर तैयार करके रख लिया जाता है। इस पाउडर का इस्तेमाल अगरबत्ती बनाने में भी होता है, लेकिन होली पर इससे हर्बल गुलाल तैयार किया जाता है। इस बार इन फूलों से चार-पांच कुंतल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।”


पांच साल से आश्रम में रह रहीं राम बेटी ठाकुर कहती हैं, “हम पहले फूलों को छांटते हैं, फिर उन्हें सुखाते हैं, सब का अलग-अलग काम है। सुखाने के बाद इसे पीसकर छानते हैं, इसमें कोई मिलावट नहीं करते पूरी तरह से सादा रहता है। इसे बनाने में बहुत अच्छा लगता है।”

वृंदावन स्थित चैतन्य विहार के महिला आश्रय सदन की वृद्ध माताओं को सरकार की ओर से पेंशन तो मिलती ही है लेकिन अगरबत्ती और गुलाल बनाने के बदले इन माताओं को इनके काम के समय के मुताबिक मेहनताना भी दिया जाता है।


प्रोबेशन अधिकारी अनुरागश्याम रस्तोगी ने बताया, “चैतन्य विहार आश्रय सदन में करीब 230 महिलाएं रह रही हैं, लेकिन इन दिनों चल रहे गुलाल बनाने के काम में वे अपनी सुविधा और समय के अनुसार ही काम करती हैं। समय के हिसाब से उन्हें बकायदा इसके लिए पारिश्रमिक भी दिया जाता है।

डीपीओ ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले वृद्ध माताओं को कम मेहनत कर आजीविका के अतिरिक्त साधन उपलब्ध कराने की सोच के साथ इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया।

जिसको लेकर जिला प्रोबेशन अधिकारी अनुरागश्याम रस्तोगी आगे बताते हैं, “मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों से गुलाल और अगरबत्ती बनाने का काम पिछले वर्ष शुरू किया गया था जिसके अंतर्गत पिछले वर्ष होली पर करीब एक कुंतल गुलाल बाजार में करीब एक लाख रुपए का बिका था।उसके बाद इस वर्ष फूलों से बने हर्बल गुलाल की बढ़ती मांग को देखते हुए इस वर्ष लगभग चार-पांच कुंतल गुलाल तैयार किया जा रहा है, ताकि बाजार की मांगों को पूरा किया जा सके।





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